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    Home»हिमाचल प्रदेश»सिरमौर»जल्द अल्ट्रासाऊंड मशीन नही चली तो फिर होगा आंदोलन: सुनील
    सिरमौर

    जल्द अल्ट्रासाऊंड मशीन नही चली तो फिर होगा आंदोलन: सुनील

    By Himachal VartaJuly 21, 2022
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    पांवटा साहिब(हिमाचलवार्ता न्यूज) ( एसपी जैरथ)पां‌वटा साहिब के सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन के ना चलने की वजह से आ रही महिलाओं को परेशानी के चलते व्यवस्था परिवर्तन मंच ने एक बार फिर इस आंदोलन को बढ़ाने का फैसला लिया है। बुधवार को व्यवस्था परिवर्तन मंच ने तहसीलदार के माध्यम से एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।

    मंच संयोजक सुनील चौधरी ने बताया कि सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की हालत इतनी दयनीय है कि यहां पर इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाएं जोकि दूरदराज इलाकों से इलाज के लिए इस अस्पताल में आती है तो यहां आकर उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए दूर-दूर जी अस्पतालों में भेज दिया जाता है जहां पर उनसे मनमाने पैसे वसूले जाते हैं।

    अल्ट्रासाउंड मशीन को चलाने हेतु प्रशासन व व्यवस्था परिवर्तन संघ के पदाधिकारियों के मध्य एक समझौता किया गया था, जिसकी प्रति लिपि सलंग्न की गई है तथा उस समझोते को 7 महीने से अधिक का समय हो चुका है परन्तु स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    मंच के संयोजक सुनील चौधरी, अधिवक्ता नरेश चौधरी और मयंक ने कहा राजपुरा अस्पताल में किसी भी प्रकार के टेस्ट, ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे इत्यादि की सुविधा उपलब्ध नहीं है। भवन की हालत भी जर्जर हो चुकी है, जिसमें की बैठना भी खतरे से खाली नहीं है।

    30 बेड के इस हॉस्पिटल में केवल मात्र 10 से 12 बेड ही लगे हैं ,जोकि मरीजों के बैठने के लायक भी नहीं हैं। जहां पर दवाइयां स्टोर की गई हैं वो भी दयनीय स्थिति में हैं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है जिससे कि दवाइयों को बचा पाना बहुत कठिन है।

    स्कूलों, कॉलेजों व महिलाओं को दिए जाने वाले सेनेटरी पैड भी अस्पताल के स्टोरों में पड़े पड़े सड़ चुके हैं जिन पर प्रबंधन का ध्यान नहीं है। मंच ने तहसीलदार से कहा है कि आंजभोज क्षेत्र बने एकमात्र अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए ताकि लोगों को परेशानी का सामना ना करना पड़े। इस अस्पताल से संबंधित बनी

    आवासीय कॉलोनी की हालत भी अत्यंत दुर्लभ है। किसी प्रकार का रखरखाव आज तक नहीं किया गया है। किसी भी प्रकार की 108 एम्बुलेंस की सुविधा भगानी क्षेत्र व राजपुरा अस्पताल में नहीं है।

    उन्होंने कहा कि अभी तक सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड शुरु नहीं हो पाए हैं और समझौते के अनुसार किसी अन्य निजी अस्पताल में भी निशुल्क अल्ट्रासाऊंड नही करवाए जा रहें है।

    जिन निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा जा रहा है उनका मापदंड सही नहीं है तथा इस तरह से अस्पताल प्रबंधन मरीजों की जान को जोखिम में डाल रहा है, अतः शीघ्र ही समझोते लागू करे अन्यथा परिणाम अच्छे नही होंगे

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